यात्रा
यात्री
जिसकी यात्रा सिर्फ शुरु होती है
समय की गाड़ी में।
जिसका कोई गंतव्य नहीं
लेकिन यात्रा अपरिहार्य।
यात्रा जिसके साथी भी तय है
और रास्ता भी।
बस बदलते है दृश्य
अंधेरी सुरंग और उसके अंत में रोशनी।
खिड़की पर ओस लेख,
पहाड़, घाटियां, हरियाली और रेत।
पड़ाव अनित्य, साथी अनित्य,
नित्य रही सिर्फ़ यात्रा।
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