खयाल

उनका खयाल बनकर चली आती यादें,

रजाई में सिमटकर गुनगुनाती यादें।

सर्द हवाओं में वो साथ बिताए पल,

क्रिशमस की रौशनी-सी झिलमिलाती यादें।

खिलखिलाते जोड़ों को राह में देखना,

मन में हल्की गुदगुदी-सी जगाती यादें।

कंधे पर उनका यूँ हाथ रख देना,

गुलाबी शॉल में लिपट जाती यादें।

शकरकंद हाथों से छूट जाना ठिठुरकर,

कुल्हड़ की चाय में घुल जाती यादें।

टिमटिमाते तारे कहते हैं हर रात,

शाम तो बीत गई, अब रह जाती यादें।

रजाई से बाहर निकले पाँव ये समझा गए मुझको,

अब वो शाम नहीं, बस लौट आती यादें।

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