संगीत
ये गीत किसके हैं
कानों में शहद घोलते
किसने सिखाया इन्हें
सुर लय ताल
संगत दे रहे हवा के झोंके
और करतल बजाएं सुखी पत्तियां
झरने दे रहे झंकार
नदी का कलरव छेड़ रहा सप्तक के तार
कभी बादलों से फूटते राग मल्हार
फिर कोयल की तान देती आलाप
पक्षियों का कोलाहल
कभी विलंबित कभी द्रुत
और तीन ताल में निबद्ध
पुरवइया छेड़े भैरवी
फीके पड़ते वीणा और मृदंग
बांसुरी मजीरा और कितने ही वाद्य यंत्र
युग युग से फूट रहा अनहद का तान
ये पेड़, झरने नदी और पक्षी
है इस संगीत के उद्गम के श्रोत
ईश्वर की मौन रचना सृजन का आधार
धरा की
धड़कन शाश्वत उपहार
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